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MOHAMMED RAFI SAHAB

काफ़ी सालों से में इस कोशिश में था के रफी साहब के लिठमें कà¥à¤¯à¤¾ कर सकता हूà¤à¥¤ अनगिनित असफलताओं के बाद में इस योगà¥à¤¯ बन पाया हूठकी इस बà¥à¤²à¥‰à¤— के माधà¥à¤¯à¤® से में अपने विचार आपके अरà¥à¤ªà¤¿à¤¤ कर सकूं। मेरा हमेशा से यही मानना है के जो कà¥à¤› à¤à¥€ मà¥à¤à¥‡ करना है वह इसी जनम में ही करना है। अगर मैंने समय नषà¥à¤Ÿ किया तो इसका पापी मेरे सिवा कोई दूसरा नही होगा। इसी तरà¥à¤• के मदà¥à¤¦à¥‡-नज़र मैंने लिखना शूरो किया। पहल किया मैंने वà¥à¤µà¥à¤µ.मोहà¥à¤¦à¥à¤°à¤«à¥€.कॉम पर और मेरे लेख वहाठपर छापने लगे। होसला बढ़ते ही मैंने यह बà¥à¤²à¥‰à¤— बनाया और मेरे दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ लिखे कई लेख मैंने यह पर छापे। यार दूसà¥à¤¤à¥‹à¤‚ ने पà¥à¤°à¤¶à¤‚सा की पर फिर à¤à¥€ मन को जà¥à¤µà¤¾à¤²à¤¾ à¤à¥à¤œà¤¨à¥‡ को तैयार ना थी। हर रोज़ इंटरनेट पर में कम से कम पाà¤à¤š घंटे बिताता हूठऔर इस दौरान कोशिश यही करता हूठकी अपनी तरफ़ से में रफी साहब को à¤à¤• नया तोहफा à¤à¥‡à¤‚ट कर सकूं। कई कमियां और खामियां अà¤à¥€ à¤à¥€ नज़र में आ ही जाती हैं, पर मà¥à¤à¥‡ इनसे à¤à¤• नयी सà¥à¤«à¥‚रà¥à¤¤à¤¿ मिलने लगती है और नठविचार मन में आने लगते हैं। रफी साहब ने मà¥à¤ जैसे करोड़ों परवानों को ज़िंदगी à¤à¤° की खà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤¾à¤ अपने अनमोल गीतों से पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ की हैं और हम अपनी ओर से जितने à¤à¥€ उनके गà¥à¤£ गायें, कम ही होगा। पर इस बात को लेकर हमें बेतहाशा नही होना चाहिà¤à¥¤ मà¥à¤à¥‡ इस बात पर अतà¥à¤¯à¤¨à¥à¤¤ ही गरà¥à¤µ है कि रफी साहब ना सिरà¥à¤«à¥à¤¤ मेरे यà¥à¤— के सबसे बड़े महापà¥à¤°à¥à¤· थे, परनà¥à¤¤à¥ वे परम देशà¤à¤•à¥à¤¤ à¤à¥€ थे। हम देशवासियों को उनके सपनों को साकार करने में हर समà¥à¤à¤µ योगदान देना चाहिà¤à¥¤
आगे अगले सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹.....
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