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Thursday 28 August, 2008
By  RAFI MURTY   00:33 | 27/Mar/2008 |  0 Comment(s)
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MOHAMMED RAFI SAHAB



 





रफी और मेरे विचार



काफ़ी सालों से
में इस कोशिश में था के
रफी साहब के
लिठमें कà¥à¤¯à¤¾
कर सकता हूà¤à¥¤
अनगिनित असफलताओं के
बाद में इस
योगà¥à¤¯ बन पाया
हूठकी इस
बà¥à¤²à¥‰à¤— के माधà¥à¤¯à¤® से
में अपने विचार आपके अरà¥à¤ªà¤¿à¤¤ कर
सकूं। मेरा हमेशा से यही मानना है के जो
कà¥à¤› भी मà¥à¤à¥‡
करना है वह
इसी जनम में
ही करना है।
अगर मैंने समय
नषà¥à¤Ÿ किया तो
इसका पापी मेरे
सिवा कोई दूसरा नही होगा। इसी
तरà¥à¤• के मदà¥à¤¦à¥‡-नज़र मैंने लिखना शूरो किया। पहल किया मैंने वà¥à¤µà¥à¤µ.मोहà¥à¤¦à¥à¤°à¤«à¥€.कॉम
पर और मेरे
लेख वहाठपर
छापने लगे। होसला बढ़ते ही मैंने यह बà¥à¤²à¥‰à¤— बनाया और मेरे दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ लिखे
कई लेख मैंने यह पर छापे। यार दूसà¥à¤¤à¥‹à¤‚ ने
पà¥à¤°à¤¶à¤‚सा की पर
फिर भी मन
को जà¥à¤µà¤¾à¤²à¤¾ भà¥à¤œà¤¨à¥‡ को तैयार ना
थी। हर रोज़
इंटरनेट पर में
कम से कम
पाà¤à¤š घंटे बिताता हूà¤
और इस दौरान कोशिश यही करता
हूठकी अपनी
तरफ़ से में
रफी साहब को
à¤à¤• नया तोहफा भेंट कर सकूं। कई कमियां और
खामियां अभी भी
नज़र में आ
ही जाती हैं, पर मà¥à¤à¥‡
इनसे à¤à¤• नयी
सà¥à¤«à¥‚रà¥à¤¤à¤¿ मिलने लगती
है और नà¤
विचार मन में
आने लगते हैं।
रफी साहब ने
मà¥à¤ जैसे करोड़ों परवानों को
ज़िंदगी भर की
खà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤¾à¤ अपने अनमोल गीतों से पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ की
हैं और हम
अपनी ओर से
जितने भी उनके
गà¥à¤£ गायें, कम
ही होगा। पर
इस बात को
लेकर हमें बेतहाशा नही
होना चाहिà¤à¥¤ मà¥à¤à¥‡
इस बात पर
अतà¥à¤¯à¤¨à¥à¤¤ ही गरà¥à¤µ
है कि रफी
साहब ना सिरà¥à¤«à¥à¤¤ मेरे
यà¥à¤— के सबसे
बड़े महापà¥à¤°à¥à¤· थे, परनà¥à¤¤à¥ वे
परम देशभकà¥à¤¤ भी
थे। हम देशवासियों को
उनके सपनों को
साकार करने में
हर समà¥à¤­à¤µ योगदान देना
चाहिà¤à¥¤




आगे अगले
सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹.....



 





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