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Friday 5 December, 2008
By  RAFI MURTY   22:29 | 22/Feb/2008 |  0 Comment(s)
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SHAYARI RAAS AA GAYI

१. सफर ज़िंदगी का कटते नही बनता था, यकायक

रहगुज़र में रफी साहब का काफिला नज़र आ गया



२. ऊपर वाले की शहादत में जब किसीने पूछा “रफी कौन था?”,

“यह कैसा इंसान बनाया मैंने” - यह आवाज़ आई



३. में तनहा रहकर भी कभी गम से वाकिफ न था,

तराने-ए-रफी जो मेरे हमसफ़र बनते राहे



४. फक्र है हमें की हम उस सरज़मीन के परिंदे हैं

जिसकी मिटटी और बूँद में रफी साहब की महक है



५. इतनी खूबसूरती छा गयी इस जहाँ में,

शायारोने इसे मोहम्मद रफी का कलम कह डाला



६. एक अरसा ज़रूर हुआ आपको अलविदा कहकर, हाँ,

लगता ही नहीं हम कभी जुदा हुए हों



७. हैरत मे पड गए लोग मुझको देख कर,

आखिर यह “रफिमुर्ति” किस का त-अ-रुफ़ है



८. तेरे तरानों मी है व्हो नशा मोहम्मद रफी,

की ज़माने भर के मयखाने वीरान हो गए



९. मौसुकी का कौन सरताज ? गायिकी का कौन शहंशाह ?

यकीनन हर लैब पे, मोहम्मद रफी का नाम था



१०. है कोई ऐसा नज़राना इस जहाँ में मेरे यारों,

जो पहले रफी साहब ने पेश न किया हो



११. तबियत बिगाड़ने पर घरवालों नो जो हाकिम को बुलाया,

पर्ची पर लिखा गया “इन्हें रफी के नगमें सुनाएँ”



१२. कल किसने देखा, कल क्या होगा यह किसने जाना,

कोई दूसरा रफी नही आएगा, रफिमुर्ति यह तुने जाना



१३. इतना बडा जूनून शायद किसी और में नही,

रफी तेरे दीवानों का अंदाज़ ही कुछ ऐसा है



१४. जब से होश संभाला था रफिमुर्ति, होश ही उड़ गए

YOON भी रफी साहब के नग्मों की बरसात हो रही थी



१५. मेरा पैगाम फकत इतना ही है, खूबसूरती जो रफी के तरानों में है वोह और कहीं नही १६. मिट चले मेरी उम्मीदों की तरह यादें मगर, आज तक तेरे सुरों से तेरी ताजगी नही गयी

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